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द्वितीय समाधि दिवस (20 मार्च 2017) | मुनिश्री क्षमासागर महाराज को दी विनयांजलि, समर्पण सभा में किया याद

मुनिश्री क्षमासागर जी महाराज लोगों के घरों और फोटो में नहीं वरन लोगों के दिलों में बसते हैं। वे ऐसे संत थे जिन्होंने श्रावकों को बेहतर मानव जीवन बनाने का अनवरत संदेश दिया। उक्ताशय के उद्गार सोमवार की सुबह वर्णी भवन मोराजी में मुनिश्री क्षमासागर महाराज के द्वितीय समाधि दिवस पर आयोजित विनयांजलि एवं समर्पण सभा में देश के विभिन्न स्थानों से आए मनीषियों एवं गणमान्य नागरिकों ने व्यक्त किए। वक्ताओं ने मुनिश्री को ऐसा प्रकाश पुंज बताया जो सदैव करूणा एंव मानवता का पथ आलोकित करता रहेगा। प्रात:काल आर्यिका तपोमति माताजी के ससंघ सानिध्य में समाधि स्थल पर भाग्योदय तीर्थ के सामने प्रार्थना सभा आयोजित की गई। छतरपुर के राजेश बड़कुल ने मेरी भावना एवं समाधिमरण पाठ प्रस्तुत कर विनयांजलि दी। आर्यिका तपोमति माताजी ने मुनिश्री से जुडे़ अनेक प्रेरक संस्मरण सुनाते हुए उन्हें एक करूणामयी विद्यमान संत बताया। इस अवसर पर मुनिश्री भव्य सागर महाराज ने संस्मरण सुनाए।

 

विनयांजलि सभा में डॉ. सरोज कुमार इंदौर, संतोष शाह, निर्मलचंद निर्मल, डॉ. उदय जैन, निधि जैन, दीप्ति चंदेरिया, मंजू दीदी ने मुनिश्री ने व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला।

 

मोराजी के वर्णी सभागार में सर्वप्रथम क्षमासागर महाराज के चित्रों का अनावरण महेश बिलहरा डॉ. जीवनलाल जैन, डॉ. सुरेश आचार्य, संतोष बैटरी ने किया। चित्र के समक्ष दीप प्रज्जवलन संतोष शाह शोलापुर, आदित्य जी बीना, पवन जैन कोटा, एवं मैत्री समूह के सदस्यों ने किया।

 

शाम आयोजित समारोह में मुनि श्री के द्वारा रचित काव्य ग्रन्थ "शिवालय के सोपान" और "शंका समाधान" पुस्तक का विमोचन किया गया।

 

तत्पश्चात शंत शिरोमणि आचार्य विद्यासागर जी महाराज के जीवन पर आधारित नाटक *आत्मान्वेषी* का मंचन किया गया। मुनि श्री क्षमासागर जी द्वारा लिखित पुस्तक *आत्मान्वेषी* का नाट्य रूपान्तरण - अर्चना मलैया, निर्देशन - अरुण पांडे, परिकल्पना - कमल जैन द्वारा, मैत्री समूह के निर्देशन में किया गया। नाटक का मंचन भोपाल, अजमेर और जबलपुर में हो चुका है। तीस में से अधिकतर कलाकार जैनेतर समाज से हैं जो सभी रंगमंच पर प्रस्तुति देते हैं। वर्णी भवन मोराजी में सागर तथा अन्य स्थानों से इस नाटक को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुँचे।

 

सभा संचालन राजेश जैन बड़कुल और डॉ. सुमति प्रकाश जैन छतरपुर ने किया। आभार राजेंद्र सुमन ने जताया। मंगलाचरण झांसी से आई यंग आर्केस्ट्रा के कलाकारों ने प्रस्तुत किया।

 

 

 

 


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