Maitree Scholar

Maitree Scholar (मैत्री विद्वत योजना)

 

Maitree Samooh is pleased to announce “Maitree Scholar”, an initiative to establish a forum to present and discuss experiences, ideas related to principles of Jainism and their relevance in modern world. Through this forum Maitree Samooh will recognize and propagate talented practitioners and researchers in areas that are directly or indirectly associated with the key principles of Jainism such as Non-violence, Vegetarianism; study of Jain Literature; research related to Jain Philosophy etc.

We are looking for research in the areas related to the Jain Philosophy, its practical and scientific approach and its relevance in modern world.

 

Sample Topics Include:

·         Business Model for self-sustaining/ profit making Goshalas

·         Advantages of Jain life style in context of following:

o    Health & Medical Science: How to get all the nutrients that human body needs on a Jain diet and lifestyle? What are the health benefits of Jain diet?

o    Ecology and Environment: How does Jain life style positively affect environment? Propose solutions of global environmental challenges such as global warming through Jain way of living

o    Economics: how would Jainism respond to key issues of development and economics

·         The study of Astronomy (Stars, Planets, Universe etc.), Physics (Matter, Atoms, Space and Motion and Time), Biology (Living beings, Microbes etc.), Mathematics in accordance to Jainism and connection with modern science

·         Relevance and Importance of Jain philosophy/ principles for achieving United Nations’ Millennium Development Goals

·         Study of contributions of Jain Literature

·         Thesis on literature / Treatises of Jain Monks

·         Non-materialism and Its relevance to modern day economics

 

How do we plan to shortlist suitable candidates?

·         Research paper competitions

·         Nomination by prominent experts and Jain Monks

·         Publication of Doctoral Thesis in relevant areas

 

Recognition and Benefits

·         Felicitation and publication of research

·         Assist in data collection and guidance by Muni Sangh / prominent Jain scholars

·         Arrange Monetary Assistance for further research

मैत्री विद्वत योजना

 

मैत्री समूह हर्ष के साथ “मैत्री विद्वत योजना” की घोषणा करती है। इस योजना का उद्देश्य एक ऐसे मंच कि स्थापना करना है जहाँ पर विद्वानगण जैन धर्म के सिद्धांतों और आधुनिक दुनिया में उनकी प्रासंगिकता से सम्बंधित अपने विचारों, अनुसन्धान एवं अनुभवों का आदान-प्रदान कर सकें। इस योजना के माध्यम से मैत्री समूह ऐसे प्रतिभाशाली शोधकर्ताओं को सम्मानित एवं प्रोत्साहित करना चाहता है जो कि प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप जैन धर्म के प्रमुख सिद्धांतों के साथ जुड़े क्षेत्रों (जैसेअहिंसाशाकाहारजैन साहित्य के अध्ययन आदिमें अनुसंधान कर रहे हैं।

हम जैन दर्शन एवं इसके प्रायोगिक एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण कि आधुनिक युग में महत्वता आदि से संबंधित क्षेत्रों में अनुसंधान के लिए शोधकर्ताओं को आमंत्रित करते हैं।

 

सम्मिलित विषयों के उदाहरण:

·        गौ-शालाओं  को आत्मनिर्भर एवं लाभप्रद बनाने हेतु व्यापारिक दृष्टिकोण

·        निम्न के संदर्भ में जैन जीवन शैली के लाभ:

o   स्वास्थ्य और चिकित्सा विज्ञान: मानव शरीर के लिए जरुरी सभी पोषक तत्वों को जैन आहार के द्वारा कैसे प्राप्त किया जा सकता है? जैन आहार के स्वास्थ्य लाभ क्या हैं?

o   पर्यावरण विज्ञान: जैन जीवन शैली वातावरण को कैसे प्रभावित करती है ? वैश्विक पर्यावरण की चुनौतियों (जैसे भू-मंडलीय उष्मीकरण या ग्लोबल वार्मिंग) का जैन जीवन शैली के माध्यम से समाधान कैसे किया जा सकता है?

o   अर्थशास्त्र: विकास और अर्थशास्त्र के प्रमुख मुद्दों का जैन धर्म के सिद्धांतों के आधार पर समाधान  

·        जैन धर्म के अनुसार खगोल विज्ञान (तारे, ग्रह, ब्रह्मांड आदि), भौतिकी (अणु, परमाणु, अंतरिक्ष, गति और समय), जीवविज्ञान (जीवित प्राणियों, रोगाणुओं आदि), गणित के सिद्धांत और उन सिद्धांतों का आधुनिक विज्ञान के साथ संबंध

·        संयुक्त राष्ट्र के सहस्राब्दि विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने में जैन दर्शन / सिद्धांतों की प्रासंगिकता / महत्वता

·        जैन साहित्य के योगदान का अध्ययन

·        जैन साधुओं कि जीवन चर्या

·        गैर-भौतिकवाद एवं अपरिगृह का आधुनिक अर्थशास्त्र के साथ सम्बंध


चयन विधि:

·        शोध पत्र प्रतियोगिताओं के माध्यम से

·        प्रमुख विशेषज्ञों और जैन मुनियों के द्वारा नामांकन

·        संबंधित क्षेत्रों में पूर्व में किये गए अनुसन्धान एवं प्रकाशन के माध्यम से


प्रोत्साहन एवं लाभ:

·        अनुसंधान के लिए सम्मान एवं प्रोत्साहन

·        तथ्यों के संग्रह और मुनि संघ एवं जैन विद्वानों का मार्गदर्शन मुहैया कराना

·        आगे अनुसंधान के लिए आर्थिक सहायता

 

 

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